کئی چاند تھے سر آسماں Free download À PDF DOC TXT eBook or Kindle ePUB free

Free read É PDF, DOC, TXT, eBook or Kindle ePUB free ☆ Shamsur Rahman Faruqi

Funkaar ki ruh ki gehrayion mein utarne ki koshish karne ke alawa hind islami tehzeeb adbi samaj angrezi siyasat aur uski vajah se tehzeeb aur tareekh ke badlalte hue paikar hamare saamne pesh karti Dehli ki mitti hui baadshah ke saaye mein falne fulne vaali is. One of the best books I have ever read in Urdu What a great research work and what a character Ms Wazir Begum was Beautiful language Absolutely Riveting

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کئی چاند تھے سر آسماںS tehzeeb ka manjarnama Ghalib Zaukdaag کئی چاند PDFEPUBGhanShyam Lal Aasi ImamBhaksha Sehbai Hakim Ehsanullah Khan ke saath saath Bahadurshah Zafar Mallika Zeenatmahal aur Nawab Shasmuudin Ahmed Khan jaisa bahut se hakiki kirdaaron se bhi jagmaga raha ha. I think its a great research by drshams u remanIts a that fact which might be not revealed and if it then it was not as as he did

Shamsur Rahman Faruqi ☆ 2 Read & download

کئی چاند تھے سر آسماں Free download À PDF, DOC, TXT, eBook or Kindle ePUB free À ❰EPUB❯ ✻ کئی چاند تھے سر آسماں Author Shamsur Rahman Faruqi – Insolpro.co.uk 18th and 19th sadi ke hind islami tehzeeb adbi samaj khaaskar dilli Th and th sadi تھے سر Kindle #211 ke hind islami tehzeeb adbi samaj khaaskar dilli ke samaj ka aaina dikhati kitabth century ke rajputane se shuru hone vaali aur ek sadi se kuch zada samay baad dilli ke Lal ille mein khatam hone vaali yeh daastan hindustani. शम्सुर्हमान फ़ारुक़ी का यह उपन्यास पढ़ने में बहुत रोचक लगा और समय लगाकर पढ़ा| इसमें हिंदुस्तान के इतिहास के उन रोचक स्याह – सफ़ेद पन्नों को उकेरा गया है जिनका जिक्र आजकल कम ही किया जाता है| उपन्यास में इतिहास इमारत झगड़े जंग षड्यंत्र सियासत कल्पना कहानी साहित्य शेरोशायरी ख़ास और आम जिन्दगी अपने आप आती गाती सुनाती सुनती चली गयी है|उपन्सास एक ऐसी औरत की जिन्दगी की अजब दास्ताँ है जिसे बेहद आम औरत होने से अपने जीवन की शुरुआत की और किस्मत की कहानी उसे देश के सबसे खास औरतों में से एक बनाते हुए धूल में मिलाने के लिए ले गई| ये दास्ताँ उस औरत की है जिसने और जिसकी किस्मत ने कभी हार नहीं और वो और उसकी किस्मत कभी जीत भी नहीं पाए| ये कहानी उस औरत की है जिसके पाकीज़ा होने पर सबको उतना ही यकीं था जितना उसके घटिया – बाजारू होने का| ये कहानी उस मुल्क की है जिसे ज़न्नत समझ कर कारवां आते गए और अपने घर बनाते गए| ये कहानी उस मुल्क की है जिसको लूटने उजाड़ने का सपना बहुत सी आँखों ने देखा| ये कहानी उस बर्बादी की है जो सिर्फ इसलिए हुई क्योंकि बर्बाद होने वालों को अपने हजारों साल के वजूद पर कुछ ज्यादा भरोसा था|उपन्यास बहुत लम्बे बारीक़ विवरणों से भरा पड़ा है जो शायद चाह कर भी उतने ऊबाऊ नहीं बन पाए हैं जितने बनाने चाहे गए हैं| आपको अपनी कल्पना शक्ति को प्रयोग करने की जरूरत नहीं पड़ती|उपन्यास कई बार पाठ्य पुस्तक की भूमिका भी निभाता है तो बार बार आगाह भी करता है कि यह मूलतः कहानीकार की वो कल्पना है जिसे वो इतिहास के दो मोती साथ पिरोने के लिए करता जाता है|उपन्यास की सबसे बड़ी खूबसूरती इस बात में है कि ये लिखा आज की हिंदी – उर्दू – रेख्ता में है मगर उस ज़माने की हिंदी – उर्दू – रेख्ता में अपने को बयां करता जाता है|